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चंपावत एक्सप्रेस: खेतीखान में शुरू हुआ दीपमहोत्सव 2018

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खेतीखान में शुरू हुआ दीपमहोत्सव 2018

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चंपावत:  जिले की पाटी तहसील के खेतीखान में 19वां 5दिवसीय दीप महोत्सव आज से शुरू हो गया है। इस दीपमहोत्सव का उदघाटन लोहाघाट विधानसभा के विधायक पूरन सिंह फर्तयाल ने आज सुबह 11बजे किया। इसके बाद पूरे बाजार में कलश यात्रा निकली गई, जिसमें खेतीखान स्थित सभी विद्यालयों ने भाग लिया तथा प्रभात फेरी व झांकियां निकालीं। छोलिया नृत्य ने सबका मन मोह लिया। वहीं सूर्य मंदिर के प्रांगण बाहर से आये व्यापारियों ने अपनी दुकानें लगाईं। कुछ व्यापारी तो पहले ही आ चुके थे। महोत्सव की पहली शांम भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम रही, जिसका उद्घाटन पूर्व-राज्यसभा सांसद महेन्द्र सिंह माहरा ने किया। नरसिंह डांडा कलाकेन्द्र के कलाकारों ने सबका मन मोह लिया। आयोजन समिति के अध्यक्ष मुकेश देवपा ने बताया कि 5 दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में अनेक प्रकार की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा तथा एक दिन बहुद्देेश्यीय शिविर का आयोजन किया जायेगा। रात के समय, विभिन्न संस्कृतिक दलों द्वारा अपने कार्यक्रम दिखाये जायेंगे।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

शौचालय बने पर…खुले में शौच के लिए जाते हैं लोग

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चंपावत: कागजों में जिले में सबके शौचालय बने पर वास्तविकता ये है-चंपावत जिले को कागजों में बता दिया गया है कि जिले में रहने वालों में सभी परिवारों में शौचालय बन चुका है,लेकिन वास्तविकता स्थिती आंकडों से कुछ अलग है जो ये वीडियो बता रहा है,ये हाल है लोहाघाट शहर से लगे फोर्ती गांव की जहां इस ब्यक्ती को अभी भी सरकार का योजनाओं का लाभ नहीं मिल नहीं पाया।ऐसा एक जगह नहीं चंपावत में ऐसे कई गांव हैं जिनमें लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं।ऐसा ही हाल आदर्श ग्राम सभा पाटी के जौलाडी , पाटी का हाल है जहां आज भी लगभग 5से 6परिवार खुले में शौच कर रहे हैं।लेकिन सरकारी कागजों में पूरा जिला खुले में शौच से मुक्त हो गया है।अब ये आंकडे सरकार को कहां और किससे प्राप्त हो रहे हैं पता नहीं।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

पर्यटकों को आकर्षित करता “अद्वैत आश्रम”

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चंपावत: मायावती आश्रम उत्तराखंड में प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है । मायावती आश्रम चम्पावत शहर से 22 कि.मी. की दुरी पर स्थित है | समुद्र तल से 1940 मीटर की ऊंचाई पर बना यह आश्रम हर साल भारी संख्या में भारतीय और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है । इस आश्रम को “अद्वैत आश्रम” के नाम से भी जाना जाता है | अद्वैत आश्रम रामकृष्ण मठ की एक शाखा है जो कि भारत के उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले में मायावती नामक स्थान पर स्थित है । यह स्थान टनकपुर रेलवे स्टेशन से 77 किमी तथा काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 167 किमी दूर चम्पावत जिले के अंतर्गत लोहाघाट नामक स्थान से उत्तर पश्चिम जंगल में 9 किमी पर है | 1998 में स्वामी विवेकानंद ने अल्मोड़ा की अपनी तीसरी यात्रा के दौरान ‘प्रबुद्ध भारत’ का प्रकाशन कार्यालय को मद्रास से हटाकर मायावती आश्रम में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया । इस आश्रम में एक छोटा सा संग्रहालय और एक पुस्तकालय भी है । मायावती आश्रम में विशेष अनुरोध करने पर रहने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है । यहां का मौसम ज्यादातर ठंडा रहता है | यहां कुमाऊंनी, हिंदी व अंग्रेजी भाषा बोली जाती है ।
मायावती आश्रम / अद्वैत आश्रम
स्वामी विवेकानन्द की प्रेरणा से उनके संन्यासी शिष्य स्वामी स्वरूपानंद और अंग्रेज शिष्य कैप्टन जे. एच. सेवियर और उनकी पत्नी श्रीमती सी. ई. सेवियर ने मिलकर March 19 , 1899 में इस आश्रम की स्थापना की थी । सन् 1901 में अपने शिष्य कैप्टन जे. एच. सेवियर के देहांत की खबर जानकर स्वामी विवेकानंद श्रीमती सेवियर को आश्वासन देने के लिए मायावती आये थे । तब वे इस आश्रम में 3 से 17 जनवरी तक रहे थे | कैप्टेन की मृत्यु के पंद्रह वर्ष बाद तक श्रीमती सेवियर आश्रम में सेवा करती थी |
स्वामी विवेकानंद की इच्छानुसार मायावती आश्रम में कोई मंदिर या मूर्ति नहीं है इसलिए यहाँ सनातनी परम्परानुरूप किसी प्रतीक की पूजा नहीं होती है |

By Amit Kumar Karnatak from  Champawat (U.K.)

बाणासुर का किला

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चंपावत (20/10): उत्तराखंड के लोहाघाट में बाणासुर का किला भगवान श्रीकृष्ण द्वारा संसार से बुराई का नाश करने की गवाही देता है।*बाणासुर का किला लोहाघाट में समुद्र तल से 1859 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण मध्यकाल में किया गया थाl एक और मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने यहां बाणासुर नाम के एक दानव की हत्या की थी। यह किला लोहाघाट से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर ‘कर्णरायत’ नामक स्थान के पास स्थित है।
कर्णरायत से बाणासुर किले तक लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने के बाद पहुंचा जा सकता है।मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बाणासुर का वध किया गया था, क्योंकि उसने श्रीकृष्ण के पौत्र का अपहरण कर लिया था।इस स्थल से एक ओर हिमालय की भव्य श्रृंखलाओं का दृश्य देखा जा सकता है तो दूसरी ओर लोहाघाट स्थित मायावती आश्रम और अन्य नैसर्गिक छटाओं का भी आनन्द लिया जा सकता है।

By Amit Kumar Karnatak from  Champawat (U.K.)

त्यौहारों बाद वापिस जाने लगे लोग

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चंपावत (20/10): नवरात्री के बाद अपने गांव,घर आये लोग वापिस अपने निवास स्थल की तरफ वापिस लौटे तो लोहाघाट,चंपावत बाजार व रोडबेज बस स्टेंड पर लोग बसों का इंतजार करते नजर आये,भीड इस कदर थी कि लोग जो भी बस आये उसमें बैठने के लिए टूट पडते।बसों की संख्या कम होने के कारण कई लोग लोहाघाट बस स्टेंड पर इंतजार करते नजर आये।छोटे वाहन स्वामियों ने इसका पूरा फायदा उठाया जल्दी व दूर जाने वाली सवरियों को ठूंस ठूंस भरा।ज्यादा परेशानी उन सवारी को उठानी पडी जो लोहाघाट,चंपावत से टनकपुर,देहरादून,दिल्ली सहित दूसरे राज्यों को जाने वाले थे।क्यों क् एक तो बसें कम थी और भीड ज्यादा थी। मजबूरी में कई लोग ज्यादा किराया देकर छोटे मैक्स वाहनों में जाने को मजबूर हुए।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

नवरात्र के अवसर पर पलायन कर चुके गांवों में भी चहल-पहल बढी

जागरण में जलती हुई आग की धूनी ,कलाखर्क।पाटी।

जागरण में जलती हुई आग की धूनी ,कलाखर्क।पाटी।

चंपावत (18/10):इन दिनों नवरात्र चल रहे हैं और नवरात्र के अवसर पर लोग अपने इष्ट देव की पूजा करने के लिए अपने गांव,घर जरूर आते हैं।जिस कारण पाटी तहशील सहित जिले के कई ऐसे गांव हैं जहा से लोग रोजगार के लिए और कई अन्य परेशानीयों के कारण पलायन कर चुके लोग नवरात्र के अवसर पर अपने अपने घरों में सपरिवार पहुंचे हैं जिस कारण इन विरान पडे गावों में चहल पहल देखते ही बनती है।नवारात्री के अवसर पर गावों में जागरण किया जाता है जिनमें डांगरों में देवता अवतरित होकर समस्या जागरण करने वाले लोगों को आशीर्वाद देते हैं।अष्टमी,नवमी के अवसर पर कलाखर्क,तपनीपाल,अमौली,मूलाकोट सहित कई गांवों में जागरण किया गया और इसके अगले दिन अपने इष्ट मंदिरों में जाकर इष्ट देव की पूजा की गई।
कलाखर्क जैसे गांव में जिस गांव में कई लोग गांव छोड कर जा चुके हैं लेकिन नवरात्र के अवसर पर सब अपने गांव पूजा पाठ के लिऐ वापिस आये हैं,सभी लोगों के आने से गांव का नजारा ही बदला हुआ है,देख कर ऐहसास ही नहीं हो रहा कि इस गांव की आबादी पलायन कर चुकी है।ईसी प्रकार कई ऐसे गांव हैं जहां आजकल काफी चहल पहल देखने को मिल रही है।
दशमी के बाद फिर होगी शूनसानी- कई गांवों के लोग अष्टमी से ही पूजा पाठ करके वापिस अपने निवास स्थल जाने लगे हैं लेकिन बहुत सारे गावों में दशमी तिथि को पूजा पाठ किया जाता है और उसके बाद सब लोग वापिस लौटने लग जाते हैं जिस कारण इन गांवों में बढी चहल पहल समाप्त हो जायेगी और फिर से घरों में ताले लटके ऩजर आयेंगे और फिर लगने लगेगा कि किस प्रकार पलायन ने इन गांवों की खुशियां समाप्त कर दी हैं।गांव से जाने वाले का दर्द यही होता है कि गांव में रहेंगे तो खायेंगे क्या,बच्चों को अच्छी शिछा कैसे दिला पायेंगे लेकिन अपना घर गांव छोडना किसी को अच्छा नहीं लगता। सरकार और जन प्रतिनियों की बेरूखी के कारण और गांव के लोगों की मजबूरी के कारण कई गांव खाली होते जा रहे हैं।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

आजादी की लड़ाई में खेतीखान का योगदान 

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चंपावत (14/10): उत्तराखंड के चंपावत जिले का खेतीखान क्षेत्र भले ही आज भी एक ग्रामीण इलाका है, पर यह पहचान का मोहताज कतई नहीं है। इस क्षेत्र का आजादी की लड़ाई में खासा योगदान था।
यहां जागोली की धर्मशाला जंग-ए-आजादी की लड़ाई की प्रमुख गवाह रही है। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी इस धर्मशाला में वर्ष 1934 में एक हफ्ते तक रुके थे। आजादी की लड़ाई के दौरान जागोली धर्मशाला स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के छिपने का महफूज ठिकाना बनी थी। शास्त्री सहित कई नामचीन शख्सियतों ने इस धर्मशाला में प्रवास किया था।
इतिहासकारों के अनुसार खेतीखान के ओलीगांव में स्वतंत्रता सेनानी दिवंगत हर्षदेव ओली के मकान के पास जागोली मंदिर परिसर की धर्मशाला गुलामी की बेड़ियों को काटने का हथियार बनी थी। उस दौर में यह धर्मशाला अंग्रेजों के खिलाफ चलने वाली तमाम गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में रही।
वर्ष 1920 में बनी यह धर्मशाला वीरान जगह पर होने से अंग्रेजों के निशाने पर भी कम रहती थी। गोरों के आतंक से बचने और रणनीति बनाने के लिए ये स्थान बेहद सुरक्षित था।वर्ष 1932 में हुए तीसरे गोलमेज सम्मेलन के दो वर्ष बाद कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में लाल बहादुर शास्त्री यहां आए। जागोली धर्मशाला उनकी गुफ्तगू का सबसे महफूज स्थान हुआ करता था। वह एक सप्ताह यहां रु के तथा आजादी की लड़ाई की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को क्रियान्वित करने का तरीका खोजा।
सेनानी हर्षदेव ओली के प्रपौत्र राजेश ओली बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने भी यहां डेरा डाल ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ रणनीति तैयार की थी।
इसके अलावा विख्यात बैरिस्ट और अंग्रेजी अखबार इंडिपेंडेट के संपादक श्रीयुत रंगायर भी अपने बेटे के साथ यहां छह माह तक रुके। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान क्रांतिकारी मदनमोहन उपाध्याय, हरगोविंद पंत, कुमाऊं केसरी बद्री दत्त पांडेय जैसे दिग्गजों ने भी यहां कई-कई बार बसेरा बना आजादी की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाया था।
भले ही पूरे देश में दो अक्तूबर को गांधी जयंती के रूप में ही ज्यादा तवज्जो दी जाती रही हो, लेकिन खेतीखान क्षेत्र में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भी खास तरीके से मनाया जाता है। जागोली जागृति स्थली के नाम से प्रसिद्ध धर्मशाला में प्रतिवर्ष शास्त्री जी की याद में दो अक्तूबर को खीर का भंडारा लगाया जाता है, जिसमें आसपास के गांवों के लोग सहभागिता करते हैं।

By Amit Kumar Karnatak from  Champawat (U.K.)

जिले में मची है रामलीलाओं की धूम

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चंपावत (14/10):   जिले में आजकल हर जगह रामलीला ओं की धूम मची हुई है पिछले 2 दिन से शुरू हुई राम लीला में जगह- जगह राम जन्म से लेकर राम के वन गमन तक की रामलीला हो चुकी है ।कहीं-कहीं पर अभी तालीम  जारी है दीपावली के बाद राम लीला शुरू होगी लोहाघाट, चंपावत ,खेती खान ,गोली भिंगराडा गमदेश,सहित कई जगहों पर वातावरण राम मय हो गया है ठंड होने के बावजूद भी रामलीला को देखने के लिए भारी संख्या में भीड़ आ रही है तथा विभिन्न किरदारों को निभाने वाले लोगों के हौसला अफजाई के लिए लोग सहयोग भी कर रहे हैं।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

मनोकामना  पूरी करती हैं मां बाराही

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चंपावत (12/10):   बाराही मंदिर देबीधुरा की गुफा का महत्व दृश्य- पाटी तहसील से लगभग 16 किलोमीटर दूरी पर देबीधुरा में स्थित बाराही मंदिर  है। जो भी लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं मां बाराही उनकी मनोकामना जरूर पूरी करती हैं।कोई भी ब्यक्ती यहां दर्शन के लिए आता है तो जब तक वह बाराही मंदिर में गुफा का दर्शन ना कर ले तब तक यह दर्शन अधूरा ही माना जाता है। माना जाता है कि बाराही देवी ने सबसे पहले इस गुफा में ही प्रवेश किया था और यहां पर ही उनकी पूजा की जाती है यह गुफा दो बड़े-बड़े ग्रेनाइट्स की चट्टानों के बीच में स्थित है और बहुत संकरी गुफा है ।इन शिलाओं के बीच में देवी की पूजा की जाती है।इस धाम की मान्यता पूर्णागिरी धाम के समान ही मानी जाती है।देबीधुरी में स्थित बाराही मंदिर ज 52 पीठों में से एक पीठ है कहा बताया जाता है कि इस गुफा के एक पत्थर से हमेशा तेल की तरह एक तरल पदार्थ रिशता रहता है जिसे लोग मां का आशीर्वाद मानते हुए अपने माथे पर लगाते हैं। इस गुफा के दूसरी तरफ भी भीम शिला है,जो भी काफी भी दर्शनीय स्थल है ।कई भक्त इस गुफा के दर्शन करने आते हैं माना जाता है कि अब भी बाराही देवी यही पर विराजमान हैं।और यही पर देवी की मुख्य  पूजा की जाती है ।आजकल नवरात्र के अवसर  में यहां पर काफी भीड़ लगी रहती है गुफा  के दर्शन केलिए लोग लाइन में खड़े रहते हैं।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

उत्तराखंड में डिस्पोजेबल प्लास्टिक और पॉलीथिन पूरी तरह से बैन

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चंपावत (12/10):   उत्तराखंड में डिस्पोजेबल प्लास्टिक और पॉलीथिन पूरी तरह से बैन कर दिया गया है। विश्व पर्यावरण दिवस पर ओएनसीजी ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक को हटाने की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई होगी, उसके बाद इसके इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्यक्रम का आयोजन वन विभाग, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गति फाउंडेशन ने किया था। इस बार विश्व पर्यावरण दिवस की थीम बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन थी.
अंततः प्लास्टिक तो बंद किया गया लेकिन उससे होने वाली व्यापारियों छोटे व्यापारियों को अधिकतर समस्याओं दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैl प्रशासन के द्वारा प्लास्टिक पर तो पूर्णता है बैन लगा दिया गयाl लेकिन प्लास्टिक जो उनके रोजमर्रा का के काम का एक जरिया बन चुका थाl उन्होंने उसके उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया हैlलेकिन उसके विकल्प के तौर पर अभी भी प्रशासन के द्वारा कोई कदम नहीं सामने आ पा रहा हैl अधिकांश जिलों में व्यापारी खासतौर पर लघु एवं सीमांत क्षेत्रों के व्यापारियों का अधिकतर समय प्लास्टिक रहित बैगों के निर्माण पर खर्च हो रहा है तथा मांग बढ़ने के साथ उनको अधिकतर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैl तथा इस व्यापारी वर्ग की प्रशासन से अपील है कि वह जल्द से जल्द इसके विकल्प को बाजार में उतारे उनके रोजमर्रा के काम आसानी से पूर्ण हो सके तथा वह ग्राहकों को भी समझा सके कि प्लास्टिक पर्यावरण के लिए अत्यधिक खतरनाक साबित हो सकता हैl

By Amit Kumar Karnatak from  Champawat (U.K.)

एकाएक हुआ मौसम में परिवर्तन,ठंड बढी

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चंपावत (11/10):   पाटी तहशील के अन्तर्गत गुरूवार दोपहर से एकाएक मौसम में परिवर्तन होने से ठंड में तो इजाफा हुआ ही किसानों को भी दिक्कत हुई।दोपहर बाद मौसम खराब हो गया और बारिश आरम्भ हो गई आशमान में काले बादल घिर आये,आजकल तहशील के सभी गावों में धान,मंडुआ,मंदरा सहित घास काटने का काम चल रहा है जिसे सुखाने के लिए लोगों ने खेतों व घर की छतों पर डाल रखा था मौका न मिलने के कारण किसान समेट नहीं पाये जिससे सब भीग गया।विद्यालय गये बच्चे भी भीगते हुए घर पहुंचे।हालाकी बारिश से धूल से राहत मिली।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

धार्मिक और आस्था का प्रतीक है रामेश्वर

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चंपावत (11/10):   जिले की लोहाघाट शहर से रामेश्वर की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है जो सरयू और रामगंगा का संगम स्थल है  भी है।यहां पर भगवान राम का मंदिर भी है ,जो एक आस्था और धर्म का प्रतीक है। यहां पर लोग नवरात्रों में  देव डांगरों को स्नान कराने के लिए जाते हैं । यहां पर जनेऊ संस्कार भी किया जाता है।यह जिले के बडे तीर्थ स्थलों में से एक है।सरयू और रामगंगा का संगम होने के कारण  यहां स्नान करने पर किये गये बुरे कार्यों से मुक्ती मिलती है। संगम स्थल के साथ ही यहां का प्राकृतिक सौन्दरय भी काफी मनमोहक है।बाहरी राज्यों के लोग भी यहां के प्राकृतिक सौन्दरय का आनंद लेने के लिए पूरे वर्ष भर आते रहते हैं तथा यहां पर बना भगवान राम का मंदिर के दर्शन कर आनन्द और आशीर्वाद प्राप्त करत सकून पाते हैं आज भी लोग यहां पर पूरे वर्ष भर आते  जाते रहते हैं माना जाता है कि  यहां बहने वाली रामगंगा और सरयू नदी का संगम पर किसी मनुष्य की मौत के बाद  अंतिमसंस्कार किया जाता है तो उसे बार बार जन्म लेने से मुक्ती मिल जाती है।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

नवरात्रि पर सिद्ध नरसिंह मंदिर में लगती है भक्तों की भीड़

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चंपावत (10/10):   जिले में वैसे तो एक से बढ़कर एक मंदिर हैं जहां लोग पूरे साल भर दर्शन के लिए आते रहते हैं ।लेकिन उनमें से कुछ मंदिर ऐसे हैं  जहां लोगों की मनोकामना पूरी होती हैं। ऐसे मंदिरों में से एक मंदिर चंपावत जिले मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर खेतीखान क्षेत्र के तपनीपाल गांव के 5 किलोमीटर खड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद आता है। जिसे सिद्ध मंदिर नाम से जाना जाता है ।यहां पर वैसे तो हर समय भक्तों की भीड़ लगी रहती है ।लेकिन नवरात्रि के समय पर यहां प्रत्येक दिन सैकडों लोग दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि की दसमी को यहां एक मेले का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से भक्त लोग आकर पूजा पाठ करते हैं। तथा अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाते हैं ।इस मंदिर में किसी भी प्रकार की बलि नहीं दी जाती है।यहां पर घंटियों और कपडे से बने से लिसान(देवता का ध्वज का प्रतीक) का चढ़ावा होता है और यहां पर आकर लोगों की हर मनोकामना पूर्ति होती है ।शाथ ही यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इतना खूबसूरत है।जो कि लोगों को अपनी तरफ खींचता है ।जिसका आनन्द लेने के लिए लोग आते हैं ।चारों तरफ से बांज के  घने पेड़ों से घिरा हुआ तथा बुरांश ऊदिश, खरसू सहित कई ऐसे पेड़ हैं ।जिनके घने जंगलों के बीच या मंदिर घिरा हुआ है। लोग मंदिर के साथ साथ यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का नजारा देखने के लिए आते हैं।आने वाले समय में अगर यहां के जनप्रतिनिधी चाहें तो यह पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित हो सकता है ,क्योंकि यहां के मनोहर दृश्य सबको प्रिय लगने वाले हैं।पहले यहां जाने के लिए एकदम खड़ी चढ़ाई चढ़ने पढ़ती थी लेकिन अब मुख्य मार्ग से सड़क के माध्यम से जुड़ने पर यहां पर लोगों की आवाजाही और बढ़ गई है ।दूर दूर से लोग मंदिर में आकर शीश नवाते हैं और जिनकी मन्नते पूरी हो जाती हैं वह लोग भी नवरात्र के अवसर पर यहां घंटियां चढ़ाने के लिए आते हैं यह मंदिर भी चंपावत के अन्य मंदिरों की तरह जिले में एक खास स्थान रखता है।बताया जाता है कि जो भी ब्यक्ती यहां जिस मनोकामना लेकर आता है वह अवश्य पूर्ण होती है।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

समाप्त होने की तरफ हैं घाराट

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चंपावत (07/10):  पहाड़ी क्षेत्रों में पहले चक्यिां ना हो कर घराट होते थे ।जिनको यहां की भाषा में (घट )कहा जाता था। जो गेहूं पीसने के काम आते थे।जहां पर तेज पानी का बहाव होता नदिंयों के किनारे या नदिंयों से गूल बनाकर पानी घराटों तक पहुंचाया जाता था जिसको घराट में लगे  पंखों में गिराया जाता है जिससे जितनी तेजी से पानी गिरता था उतनी तेजी से ही फर (पंख)जो लकडी के बने होते थे घूमते हैं,और इतनी तेजी से ही,उसमें लगी पत्थर की चक्कियां घूमते हैं जिस कारण एक तकनीकि के माध्यम से ऊपर से गेहूं के दाने गिराये जाते हैं और गेहूं पिसा जाता है। लोग  कुछ समय पहले तक पूरी रात भर जागरण करते हुए धराटों में गेहूं पिसाई का कार्य करते थे, और सुबह के समय ही घर जाते थे ।यह घराट बिल्कुल स्वदेशी होते थे।घराटों में पिसा हुआ गेहूं का आटा शुद्ध और पौस्टिक माना जाता है। धराटों में साफ सफाई का बहुत ध्यान रखा जाता था। लेकिन धीरे-धीरे चक्कियां आने से घराटों का अस्तित्व समाप्ति की ओर हो गया है ।घराट अब पहाड़ी क्षेत्र के दूरदराज के गांव में कहीं-कहीं पर ही देखने को मिलते हैं जहां पर अभी भी बिजली की व्यवस्था नहीं है या फिर जहां चक्कियों  नहीं हैं।तो वहां पर अभी भी गेहों पिसाई का काम घराटों के माध्यम से ही किया जाता है ।सरकारों  और जनप्रतिनिधियों को भी चाहिए कि हमारी पुरानी विरासत घराटों को  पुनः जीवित करने के प्रयास करते हुए इनको बचाने के बारे में सोचा जाए।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

 संकुल स्तरीय खेल कूद प्रतियोगिता का शुभारंभ

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चंपावत (06/10):  विद्यालयों की संकुल स्तरीय प्रतियोगिता शनिवार को पूरे पाटी,खेतीखान,भिंगराडा,देबीधुरा सहित पूरे जिले में यह प्रतियोगिता सुरु हुई।इनमें प्रतियोगिताओं में संकुल के सभी प्राथमिक,उच्चतर माधयमिक,इंटर कालेजों के बच्चों ने दौड,लम्बीकूद,सहित कई प्रतियोगिताओं में छात्राओं और छात्रों ने अपना दम खम दिखाया।संकुल स्तर पर पहले तीन स्थान पाने वाले बच्चों को मेडल दिया गया,अब यह बच्चे ब्लाक स्तर पर प्रतिभाग करेंगे।
पूरी जानकारी ना होने के कारण कई निजी विद्यालयों के बच्चे नहीं जा पाये प्रतियोगिता में- संकुल स्तरीय इस खेल प्रतियोगिता में पूरी लिखित जानकारी ना होने के कारण कई निजी विद्यालयों के बच्चे इस प्रतियोगिता में सामिल नहीं हो पाये। मूलाकोट संकुल में पिछले साल मैडल पाने में दूसरे स्थान पर रहने वाले रहने वाले एस.एस.पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया की खंड कार्यालय से वाटसऐप भेजकर सूचना भेजी थी लेकिन निजी विद्यालयों के लिए कोई गाइड लाइन नहीं थी।और नाहीं संकुल प्रभारी द्वारा ही कोई सूचना विद्यालय को दी गई जिस कारण पिछली बार 24मैडल प्राप्त करने विद्यालय के बच्चे इस बार प्रतिभाग नहीं कर पाये।

By Subhash Chandra Jukariya  & Lalit Gahtori  from  Champawat (U.K.)

प्रशिक्षित बेरोजगारो ने की  हस्ताक्षर अभियान यात्रा की अगुवाई

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चंपावत (06/10): कल  बीपीएड, एमपीएड प्रशिक्षित बेरोजगारो ने जिले में हस्ताक्षर अभियान रथ की शुरुआत की . शुक्रवार को जिले में प्रशिक्षितों की ओर से हस्ताक्षर अभियान के साथ ही जिले के व्यायाम शिक्षक विहीन सरकारी स्कूलों में बीपीएड एमपीएड प्रशिक्षितों की नियुक्ति को लेकर प्रर्दशन भी किया गया . इस मुहिम में बीपीएड बेरोजगार संगठन के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के अलावा जिले के तमाम प्रशिक्षित बेरोजगारों ने शिरकत की .
एक सप्ताह पहले से जिले के युवाओं के माध्यम से सोशल नेटवर्किंग के जरिये जारी पोस्ट में जिले के बेरोजगारों ने आगाह किया गया था कि शुक्रवार पांच अक्टूबर को बीपीएड, एमपीएड प्रशिक्षित बेरोजगार और संगठन की प्रदेश कार्यकारिणी टीम जिले में जागरूकता रैली के साथ ही हस्ताक्षर अभियान रथ यात्रा शुरूआत करने जा रही है . जिसमें जिला सहित प्रदेश स्तर की टीम के सभी बेरोजगार प्रतिभाग करेंगे . प्रशिक्षित बेरोजगारों के इस प्रदेशव्यापी अभियान के तहत जिले के गोरलचौड मैदान में दोपहर दो बजे से स्थानीय बेरोजगारों की ओर से इस अभियान की शुरुआत की गई . बीपीएड, एमपीएड बेरोजगार संगठन की ओर से जारी इस अभियान में सैकड़ों की संख्या में बेरोजगारों शामिल हुए . इस मुहिम में शामिल प्रशिक्षित बेरोजगारों ने कहा कि पिछले एक दशक में प्रदेश में प्रशिक्षित बेरोजगारों की लंबी फौज खड़ी हो गई है . रोजगार की आस में एक के बाद एक व्यायाम प्रशिक्षित बेरोजगार नौकरी की आयु सीमा पार करते जा रहे हैं . हस्ताक्षर मुहिम में शामिल बेरोजगारों का कहना है कि सोई सरकार को जगाने के लिए वह प्रदेश स्तर पर एकजुट हो गये हैं . कहना है प्रशिक्षण में लाखों जमापूंजी खर्च कर वह अभी भी भी बेरोजगारी झेल रहे हैं . जबकि उनके साथ प्रशिक्षण प्राप्त यूपी और हिमांचल के अधिकांश साथी स्कूलों में अपनी सेवा दे रहे हैं . इस सबके चलते प्रशिक्षितों ने प्रदेशव्यापी हस्ताक्षर रथ यात्रा अभियान के तहत चम्पावत जिला मुख्यालय के गोरलचौड मैदान में एकत्रित होकर सरकार से जिले के विभिन्न स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों के समायोज की बात सामने रखी है .

By Subhash Chandra Jukariya  & Lalit Gahtori  from  Champawat (U.K.)

मनोरंजन के लिए वो अब नहीं रचते स्वांग

Photo: Possessed by his art, a Bahurupi transforms, a video by People's Archive of Rural India

Photo: Possessed by his art, a Bahurupi transforms, a video by People’s Archive of Rural India

चंपावत (06/10):  विलुप्ति की कगार पर खड़ी हमारे मनोरंजन की सबसे पहली कड़ी स्वांग रचने की परंपरा अब सिमटने लगी है . पहले मनोरंजन के साधनों की कमी के कारण अनेक स्वांगी विधा के जानकार कलाकार विभिन्न अवसरों में स्वांग रचकर लोगों का मनोरंजन करते थे . वर्तमान में मनोरंजन के अन्य आधुनिक साधनों के चलते यह विधा धीरे धीरे अब समाज से दूर होती जा रही है .
आज भी जब किसी मजाकिया व्यक्ति की बात सामने आती है तो उसके द्वारा विभिन्न अवसरों पर रचे गये स्वांग की बात सामने आती है . प्रत्येक गांव में एक ना एक व्यक्ति आज भी इस हुनर का धनी रहा है . पर अब इस तरह स्वांग रचकर पारंपरिक त्योहारों, आयोजनों आदि के अवसर अपनी विधा दिखाने से अधिकतर स्वांगी दूरी बनाने लगे हैं . जो व्यक्ति स्वांग रचता है स्थानीय भाषा में उक्त व्यक्ति को स्वाग्या कहा जाता है . जो उस समय ग्रामीणों के मनोरंजन का भरपूर साधन हुआ करता था . नित नये गप्प समाचार, कथा-कहानी, लतीफे-चुटकुले आदि के अलावा अपनी विशेष पोशाक पहनकर लोगों को सुनाता तो खड़े-खड़े लोग हंसते-हंसते लोटपोट होने लगते . अब कभी-कभार रामलीला और होलियों मेंं ही कहीं कहीं इस एकमात्र प्राचीन विधा को कुछेक स्वाग्या महज जिंदा रखे हुए हैं .

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

पहली ही वर्षा में में खुली निर्माण कार्यों की पोल

कौज में बने गड्ढे व बहता पानी

कौज में बने गड्ढे व बहता पानी

चंपावत (05/10): खेतीखान से चेतचंडी तक की सडक बनने के बाद पहली ही बारिश नहीं झेल पाई।तपनीपाल से चेतचंडी सडक में कई जगह घटिया सामग्री का प्रयोग हुआ है। इसका संकेत स्कबर,कौज और सडक के किनारों में बनी दीवारें दे रही हैं। कौज और स्कबरों में बने गड्ढे और इनके ऊपर से बहता पानी सब बयां करने को काफी है। सडक में कई जगह कींचड व पानी भरा होने से आवाजाही में भी दिक्कत हो रही है। कई जगह मलबा पडा हुआ है। जिले में कई जगह सडकों का जाल बिछ रहा है पर गुणवत्ता पर ध्यान न देने से ये सड़कें खतरे और दुर्घटना का कारण बन रही हैं. हालांकि अभी तक कई सडकें ऐसी है जिन पर गाडी चलाने की अनुमति प्रशासन ने नहीं दी है , लेकिन धडल्ले से इन सडकों पर वाहन सवारी लेकर चल रहे हैं, जिन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

 

रंग ला रही है शिक्षण कार्यों को बढ़ावा देने की मुहिम

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चंपावत (05/10): वर्तमान कठिनाई के युग में छात्रों में शिक्षण कार्य के प्रति रुचि लाने के लिए प्रायः विद्यालय स्तर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम तथा अनेक प्रकार की मुहिम चलाई जाती है ।इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए पाटी तहसील में स्थित धूनाघाट गांव के राजकीय इंटर कॉलेज में  इसी प्रकार की मुहिम चलाई जा रही है ।जिससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि लाई जा सके प्रधानाचार्य दीपक देऊपा जी द्वारा बताया गया कि विद्यालय स्तर पर छात्रों में इस प्रकार की रुचि लाने के लिए एक अलग प्रकार से संग्रहालय बनाया गया है। जिसमें बच्चे अपने स्तर से किताबों का अध्ययन कर सकते हैं ।तथा आगामी विभिन्न स्तर की परीक्षाओं के लिए तैयार हो सकते हैं।

Amit Kumar Karnatak from  Champawat (U.K.)

टनकपुर के युवक की अहमदाबाद में संदिग्ध हालत में मौत 

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चंपावत (04/10): टनकपुर के ग्राम थ्वालखेड़ा निवासी एक युवक की अहमदाबाद गुजरात में संदिग्ध मौत का मामला प्रकाश में आया है ।28 वर्षीय युवक दीपक सिंह महर पुत्र स्वर्गीय रघुवर सिंह महर वहां की किसी कंपनी में नौकरी करता था। कोतवाल अरुण कुमार वर्मा ने बताया ग्राम प्रहरी ने ऐसी सूचना युवक के घर में आने की जानकारी उन्हें दी. उन्होंने बताया युवक के गले में चोट के निशान पाए जाने और संदिग्ध परिस्थितियों में उसका शव बरामद होने से उसके परिजन और संबंधी हत्या की आशंका जता रहे हैं लेकिन अभी तक यह बात पुख्ता नहीं हुई है। बहरहाल पुलिस घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है।

नाकाम साबित हो रही है स्वच्छ्ता मुहिम

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स्वच्छ्ता को अपनी आदतों में डालने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी धारा कतिपय बार प्रयास किया है उनका कथन था स्वच्छता को भी आप अपना रोजमर्रा की जिंदगी का ये हिस्सा बना लीजिए lलेकिन लोगों के द्वारा इस मुहिम को आगे बढ़ाने के बावजूद भी प्रशासनिक स्तर से कोई सहयोग नहीं मिल पा रहा है जिले के कतिपय क्षेत्रों में देखा जा सकता है कि स्वच्छता के प्रतिक जैसे सुलभ शोचालय कूड़ेदान तथा विभिन्न प्रकार की मुहिम जमीनी स्तर पर नाकाम साबित हो रही हैं।
लेकिन किसी का कारणवश प्रशाशन के द्वारा इन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है और साथ ही यह रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग होने में नाकाम साबित हो रही है।

Amit Kumar Karnatak from  Champawat (U.K.)

सडक में बने  गड्ढे से हो सकती है बडी दुर्घटना

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 चंपावत (04/10): जिले के खेतीखान और पोखरी के बीच में सडक पर बने गड्ढे से कभी कोई घटना घट सकती है।स्थानीय लोगों ने गड्ढे के दोनों तरफ पत्थर रख दिये हैं। NH बने इस गड्ढे में ना तो किसी अधिकारी की नजर पड रही है और ना ही किसी जनप्रतिनिधी की।रोज सैकडों वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

जिले के कई एटीएम हुए खाली, जनता परेशान

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 चंपावत (03/10):  चंपावत जिले में एटीएम में पैसे नहीं होने से जनता बहुत परेशान है। लोहाघाट चंपावत से लंबी यात्रा करने वाले लोगों को काफी दिक्कत हो रही है ।आज कोई भी ब्यक्तीअपने साथ रुपया लेकर नहीं चलता है इसकी बहत सारी वजह हो सकती हें।लोग जेब मेंअपना एटीएम लेकर के चलते हैं लेकिन चंपावत जिले में कई ऐसे एटीएम हैं जो केवल शो पीस बने हुए हैं क्योंकि उनमें रुप ही नहीं है लोहाघाट चंपावत सहित कई ऐसे एटीएम हैं जिनमें से रुपयानहीं निकल पा रहा है। कुछ एटीएम में रुपया निकल रहा है तो वहां पर लोगों की लंबी लाइनें देखने को मिल रही है लोगों का कहना है कि अगर एटीएम से पैसा नहीं होगा तो दो-चार दिन में और दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि आज हर व्यक्ति एटीएम से ही रुपए निकालकर कार्य करता है।

पेट्रोल पंप से रोडवेज स्टेशन लोहाघाट तक पार्किंग बनाए जाने हेतु की गई मीटिंग

 चंपावत (03/10): जनपद चंपावत के थाना लोहाघाट क्षेत्र अंतर्गत आए दिन जाम की समस्या के मद्देनजर आज दिनांक 3 अक्टूबर 2018 को श्रीमान पुलिस अधीक्षक चंपावत द्वारा पीडब्ल्यूडी और एनएच के अधिकारियों के साथ पेट्रोल पंप लोहाघाट से रोडवेज स्टेशन लोहाघाट तक रोड के दोनों ओर पार्किंग बनाए जाने हेतु मीटिंग की गई। पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा पीडब्ल्यूडी और एनएच के अधिकारियों को मौके में जाकर सड़क के दोनों तरफ गड्ढों को भरे जाने, नालियों को बनाने, नालियों के ऊपर सीमेंट का स्लैब बनाकर फुटपाथ बनाए जाने तथा पेट्रोल पंप से रोडवेज स्टेशन लोहाघाट तक रोड के दोनों तरफ मिट्टी का भरान कर पार्किंग स्थल बनाए जाने हेतु निर्देशित किया गया।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

छीनीगोठ हाईस्कूल मे विश्व अहिसा दिवस के अवसर पर निकलीं आकर्षक झाकियाँ 

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चंपावत  (02/10) : गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर राजकीय उच्चतर माद्यमिक विद्यालय छीनीगोठ मे दोनो महापुरुषों की झाकियाँ निकाली गई और प्रभात फेरी मे स्वच्छता ही सेवा ,नशा हटाओ जीवन बचाओ ,बेटी बचाओ अभियान तथा देशभक्ति के स्लोगन उच्चारित कर जन जागरूकता प्रसारित की गई। प्रभात फेरी के पश्चात प्रधानाचार्य श्री छोटेलाल वर्मा जी ने झन्डा रोहण किया ।महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री जी के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया।सास्कृतिक कार्यक्रमो मे स्वच्छता नाटक पेश किया गया।स्कूल चलो अभियान के लिये “हिट सरू स्कूल जानों” होली गीत प्रस्तुत किया गया।बच्चो ने आकर्षक देशभक्ति गीत और भाषण पेश किये।संचालक श्री त्रिलोचन जोशी ने महात्मा गांधी और शास्त्री जी के जीवन पर प्रकाश डाला उन्होने सामाजिक बुराइयो से दूर रहने का संदेश दिया।इस अवसर पर बच्चो के लिये विशेष भोज का आयोजन हुआ।इस अवसर पर श्री बेचन यादव,श्री अकबर अली,श्री पल्लव जोशी,श्री पवन कुमार,श्री उमेश भट्ट,श्री राजेन्द्र बिष्ट,श्री ओम प्रकाश ,श्रीमती बसंती चन्द,श्रीमती बची बिष्ट ,श्री नन्दन कुमार मौजूद रहे।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

जयंती  पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम

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चंपावत  (02/10) : 2 अक्टूबर गांधी जयंती के रूप में मनाया जाने वाला पर्व है  जोकि पूरे देश भर में धूम धाम से मनाया गया। साथ ही लाल बहादुर शास्त्री जयंती भी मनाई जाती है जोकि हर्षोल्लास के साथ मनाई गई जिले भर में कई विद्यालयों में इस उपलक्ष पर कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा जिनमें निबंध प्रतियोगिता सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और जिसमें मुख्य आकर्षण का केंद्र युवाओं के द्वारा लगाई गई दौड़ एक तथा आदि अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए और जिले के अधिकांश विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए गए ।लेकिन कुछ विद्यालयों में इस उपलक्ष पर अवकाश भी रहा ।जिले के समस्त सरकारी अर्ध सरकारी विभागों द्वारा भी ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

Amit Kumar Karnatak from  Champawat (U.K.)

 

देवीधुरा में बच्चों ने निकाली प्रभात फेरी, की मंदिर की सफाई

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देवीधुरा (02/10): गांधी जयंती के अवसर पर पाटी के देवीधुरा में बच्चों ने प्रभातफेरी निकाली तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य ने विद्यालय प्रांगण में झंडारोहण किया ।उसके बाद बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये साथ ही बाराही मंदिर देवीधुरा में जाकर बच्चों ने सफाई अभियान चलाया जिसमें विद्यालय के प्रधानाचार्य बृज मोहन जोशी सहित पूरा स्टाफ भी सफाई में जुटा रहा । विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बच्चों को महात्मा गांधी तथा लाल बहादुर शास्त्री के बारे में विस्तारपूर्वक बताया साथ ही बच्चों को कहा गया कि वह इन दोनों महान विभूतियों की आदर्शों का पालन करते हुए उनके आचरण और व्यवहार को अपने जीवन में लाएं तथा उनके बताए गए रास्ते पर चलें  और सऱाई पर ध्यान दें जिससे बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

हर्षोल्लास के साथ बनाई गई गांधी जयंती 

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चंपावत (02/10): चंपावत जिले में बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ गांधी जयंती मनाई गई जिसमें सभी सरकारी कार्यालयों पर झंडारोहण किया गया त था जिले के सभी विद्यालयों में सुबह सबसे पहले बच्चों नेप्रभात फेरी निकाली तथा तथा विद्यालयों में संस्कृत प्रोग्राम का आयोजन किया गया ।गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन के बारे में विस्तारपूर्वक से बच्चों को विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा बताया गया । विद्यालयों में इस अवसर पर निबंध ,वाद विवाद व खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया और स्वच्छता के बारे में बताया गया। पाटी,भिंगराडा देवीधुरा, लोहाघाट ,बाराकोट तथा जिला मुख्यालय में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। सभी कार्यालयों के आस पास झाड़ियों का कटान किया गया तथा स्वच्छ और स्वस्थ रहने का संदेश दिया गया।

By Subhash Chandra Jukariya  from  Champawat (U.K.)

 दीप महोत्सव समिति के सदस्य मिले विधायक से

विधायक के साथ समिति के सदस्य।

चंपावत (01/10):जिले के खेतीखान में लगने वाले दीपमहोत्सव के समिति के सदस्य  मुकेश राज के नेत्रत्व में लोहाघाट विधायक पूरन सिंह फर्तयाल से मिले।शिष्टमंडल ने महोत्सव में होने वाली परेशानीयों से विधायक को अवगत कराया अौर पांच दिवशीय इस महोत्सव को और भब्यरुप देने के लिए सहयोग की बात रखी।विधायक ने महोत्सव की परेशानीयाें को दूर करने का तथा  कमियों को दूर करने का आश्वासन समिति के सदस्यों को दिया।

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