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सोनभद्र एक्सप्रेस: ऐतिहासिक कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध है लखनिया दरी

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ऐतिहासिक कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध है लखनिया दरी

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सोनभद्र सोनभद्र जिले के सुकृत से कुछ की दूरी पर स्थित है लखनिया दरी अपनी अपनी ऐतिहासिक कलाकृतियों के लिए एक अत्यंत प्रसिद्ध स्थल है। यह स्थान पहाड़ो के बीच बसे गुफाओ के लिए भी प्रसिद्ध है। जहाँ हम अनेक प्रकार के पहाड़ी चित्रो से भी अवगत होते है। पहाड़ी गुफाओं में बने इन घोड़े और पालकी के ऐतिहासिक चित्रो को हम “कोहबर” नाम से जानते है। यहां घूमने के लिए सावन माह (जुलाई-अगस्त) अत्यंत उत्तम समय है।सावन के महीने में  आस पास के जिले से व अन्य प्रदेशो से आने वाले सैलानियो के लिए एक अत्यंत पसंदीदा स्‍थल होता है।

by Omprakash Kushwaha from Sonbhadra (UP) – 231216

नेहरू जी ने  रखी थी रिहन्‍द बांध की आधारशिला

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सोनभद्र सोनभद्र- रिहन्‍द बांध की आधारशिला 3 जुलाई 1954 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने  रखी और 9 वर्ष बाद 6 जनवरी 1963 को इसका उद्घाटन हुआ, इसका नाम उ. प्र. के पहले मुख्यमंत्री के नाम पं.  गोविंद वल्लभ पंत के नाम पर रखा।रिहन्द नदी, जिसका पुराना नाम रेणुका नदी है। इसका उदगम सरगुजा स्थल मतिरिंगा पहाड़ी के पास  से हुआ है। यह नदी सरगुजा ज़िले में दक्षिण से उत्तर से की ओर प्रवाहित होते हुए उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले के चोपन (गोठानी) के समीप सोन नदी में मिल जाती है। छत्तीसगढ़ में इसकी लम्बाई 145 किलोमीटर है। प्रदेश की सीमा पर रिहन्द बाँध बनाया गया है, जिसका आधा हिस्सा उत्तर प्रदेश की सीमा पर (गोविन्द वल्लभ पन्त सागर) पड़ता है। इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ गोवरी, मोरना, मोहन आदि हैं। रिहन्‍द बांध की जल संग्रहण क्षमता इस प्रकार है- जल संग्रहण क्षेत्र 5148 वर्ग प्रति किमी और जल भण्डारण क्षमता 10608 लाख घन मीटर है, इसकी ऊंचाई 91 मीटर लम्बाई 934 मीटर है। यह जलाशय 30 किमी लम्बा व 15 किमी चौडा है। इस बांध में हाईड्रो इलेक्ट्रिक पॉवर जेनरेशन द्वारा 300 मेगावाट की बिजली उत्‍पन्‍न की जाती है। इसे उत्‍तर प्रदेश हाईड्रो इलेक्ट्रिकसिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड प्रबंधित करता है।  इस बांध में 61 संयुक्‍त और स्‍वतंत्र ब्‍लॉक है। इस बांध के पानी को पूरे राज्‍य में साल भर, खेती योग्‍य भूमि को सीचने के लिए दिया जाता है।

by Omprakash Kushwaha from Sonbhadra (UP) – 231216

कितने इतिहास छुपाये हुये है गुप्‍तकाशी

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सोनभद्र (18/10): सोनभद्र के शिवद्वारा क्षेत्र में ​​​​​पुरातात्विक खोजाे के कारण प्रसिद्ध बेलन घाटी में खुदाई या खेती के दौरान मिल रही मूर्तियां लोगों के लिए कौतुहल का विषय है। आज यह क्षेत्र गुप्‍तकाशी के नाम से प्रसिद्व है। जो न जाने कितने इतिहास को अपने अन्‍दर छुपाये हुये है। इस इलाके मे खुदाई के दौरान हर रोज सैकडों साल पुरानी मूर्तियां मिलती है। कई लोंग खुदाई दौरान प्राप्‍त मूर्तियों को संग्रहालय में रखने की जगह अपने घरो में रखते है। इन मूतियों का संरक्षण के अभाव में यत्र-तत्र रखी हुई सैकडों मूतियां नष्‍ट होने के कगार पर है। इतिहासकार कहते है कि सबसे पहले आदिमानवों का बसाव सोनभद्र से निकलने वाली और यहां बहने वाली बेलन नदी घाटी में हुआ.

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इतिहासकार बताते है कि बेलन घाटी की सभ्‍यता दुनियां भर में सबसे पुरानी मनी गई है। बेलन घाटी पर रिहंद बाध बनाने के दौरान खुइाई में मिले अवषेश को पाषाण काल की सभ्‍यता से भी पुरानी बताई गई। यहां रहने के लिए गुफा थी, पहनने के लिए खाल और छाल तथा खाने को वन संपदा अौर शिकार प्रचुर मात्रा में उपलब्‍ध था। इतना ही नहीं इतिहासकार इस संबंध में कहते है कि यही कैमूर श्रृखलाओं से सर्वप्रथम प्रागैतिहासिक चित्रकला की खोज प्रारंभ हुई चित्रांकन और रेखांकन मनुष्‍य जाति की सबसे प्राचीन कला हैं। आदि मानव गुफाओं की दीवारों का प्रयाेग के कैनवास के रूप में किया करते थे। जब भाषा का ज्ञान नहीं था, लिपि का विकास नही हुआ था, उस समय जाने -अनजाने अादिमानवों ने अपने कालखंड का समूचा इतिहास चित्रों के माध्‍यम से उकेर दिया। बेलन की संस्‍कृति लगभग सवा लाख वर्श प्राचीन है। इसकी घाटियो में अनेक शैलचित्र उपलब्‍ध है।जिसमें मुक्‍खा फाल का शैल चित्र गुहाचित्र सर्वाहिक प्रसिद्व है।

by Omprakash Kushwaha from Sonbhadra (UP) – 231216

कला-संस्कृति को समेटे हैं प्राचीन गुफाएं

माड़ा की गुफाएं

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सोनभद्र (15/10): प्राकृतिक सुन्‍दरता से भरपूर यूपी का सोनभद्र जिला राज्य का र्भौगौलिक क्षेत्र मे दूसरा सबसे बड़ा जिला है। यह जिला, सांस्‍कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को अपने आप में समेटे है। यहां की गुफाओं से रामायण काल की यादें जुड़ी है। अनपरा से महज चालीस से पचास किमी की दूरी पर रामायण काल के जीवंतता की जीती-जागती प्रमाण माड़ा की गुफाएं है।

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जिला सोनभद्र  धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से काफी समृद्ध है।  यह जिला, सांस्‍कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को अपने आप में समेटे है। यहां की गुफाओं से रामायण काल की यादें जुड़ी है। अनपरा से महज चालीस से पचास किमी की दूरी पर रामायण काल के जीवंतता की जीती-जागती प्रमाण माड़ा की गुफाएं है। माड़ा की गुफाएं सातवीं-आठवीं सदी की शैलोत्कीर्ण रॉक कट गुफाएं हैं जिनकी तुलना अजंता और एलोरा की गुफाओं से की जाती है। यहा की मान्यता है कि रावण ने मंदोदरी के साथ इन्हीं गुफाओं में गंधर्व विवाह रचाया था। रावण माड़ा नामक गुफा में नटराजन की नृत्य करती मूर्ति, पत्थर ढोते वानरों के चित्र, देवी देवताओं के चित्र के साथ बने रहन सहन कक्ष भी प्राचीन सभ्यता की कहानी अपने अाप कहते नजर आते हैं।

प्राचीन काल की  250 रॉक  चित्र

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सोनभद्र जिला , गुफा पेंटिग्‍स  के लिए बहुत विख्‍यात है। यहां प्राचीन काल की काफी चित्रकलाएं आज भी देखने को मिलती है। यह पेंटिग्‍स, विंध्‍य और कैमूर पर्वतमाला की गुफा आश्रयों में स्थित है। यहां लगभग  250 रॉक कलाएं होगी।  यहां की कुछ उल्‍लेखनीय पेंटिग्‍स है लेखनिया, पंचमुखी, काउवा खोह और लखमा में स्थित है। यह चित्र, मध्‍यपाषाण काल से सौरपाषाण काल तक की अवधि पर प्रकाश डालती हैं। जबकि, पंचमुखी गुफाएं , रॉबर्ट्सगंज से  8 किमी. औरऔर लेखनिया गुफाएं 22 किमी. की दूरी पर स्थित हैं, वहीं काउवा खोह और लखमा गुफा, चारूक के नजदीक स्थित है यह  मउ कलां गांव के पास हैं। इन स्‍थलों में से, काउआ खोह रॉक शेल्‍टर, खोडवा पहाड़ में स्थित है जो रॉक पेंटिग्‍स का सबसे बड़ा अड्डा और प्रर्दशन स्‍थल है। इन गुफाओं में स्थित चित्र, उस काल की संस्‍कृति और कला को बखूबी बयां करती है ।

by Omprakash Kushwaha from Sonbhadra (UP) – 231216

अमिला धाम में लगता है आदिवासियों का मेला 

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सोनभद्र (13/10):  सोनभद्र के नगवां ब्लाक के चकरिया जंगल के नजदीक अमिला धाम लोगों के आस्था का केंद्र है। वासंतिक और शारदीय नवरात्र में क्षेत्र के आदिवासियों का यहां मेला लगता है। मनौती पूरी होने पर लोग पशु बलि देते हैं। समाज के मुख्य धारा से कटे और एक प्रतिबंधित संगठन के कारकून भगवती के दर्शन पूजन के लिए जाते हैं। आदिवासियों का नवरात्र में यह प्रमुख तीर्थ स्थल है। मान मनौती ओझइती, झाड़ फूंक समेत सांग लगाने तक की क्रिया पूरी की जाती है। नवरात्र भर यहां मेला लगा रहता है। श्रद्धालुओं को इस तीर्थ स्थल तक पहुंचने के लिए सुविधाओं का अभाव है। नक्सल बेल्ट होने के कारण भय का वातावरण भी बना रहता है। तमाम समस्याओं के बाद भी मां के दरबार में माथा टेकने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु तड़के पहुंचे। यहां पर मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

by Omprakash Kushwaha from Sonbhadra (UP) – 231216

सहजयोग ध्‍यान केन्‍द्र रावर्टसगंज सोनभद्र

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सोनभद्र (10/10):  सरस्‍वती शिक्षा संस्‍थान स्थित सहजयोग ध्यान केंद्र रावर्टसगंज में हर रविवार को सामूहिक ध्‍यान का आयोजन किया जाता है । इस सामूहिक ध्‍यान से  परमात्मा की  सर्वव्यापी शक्ति के साथ एक सहज जागृति और हमारी मौलिक ऊर्जा का अहसास होंता है।  कुंडलिनी की जागृति, दिव्य ऊर्जा को उन छह चक्रों या ऊर्जा केंद्रों के माध्यम से प्रवाहित होते है। जो शरीर के शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलुओं का ध्यान रखते हैं । आज की तेजी से आगे बढ़ रही दुनिया में हम अक्सर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम खुद को निचोड़ लेते हैं। तनाव उसी का परिणाम है और यह हमारे शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव भी डालता है। लेकिन सहज योग स्वयं को तनावमुक्त रखने का सबसे आसान तरीका है। यह हमें प्रेम और करुणा का अनुभव करने में सक्षम बनाता है। सहज योग का क्या अर्थ है? ‘सह’ का अर्थ है हमारे साथ, ‘ज’ का अर्थ है पैदा हुआ और ‘योग’ का अर्थ है संघ। सहज योग इसलिए सहज है। इसके माध्यम से त्रिकास्थि हड्डी में स्थित अवशिष्ट दिव्य ऊर्जा, जागृत और सक्रिय रहती है। हमारे शरीर में तीन प्रकार की नाड़ियाँ हैं, पहला है इडा सहानुभूति तंत्रिका तंत्र, जो बाईं ओर स्थित होता है और हमारे स्वभाव को नियंत्रित करता है। दूसरा है पिंगला सहानुभूति तंत्रिका तंत्र, जो दाईं ओर स्थित होता है और हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है। तीसरा है सुषुम्ना नाड़ी परानुकंपी तंत्रिका तंत्र, जो केंद्र में स्थित होता है और इसमें चक्र होते हैं जो हमें गुणात्मक विशेषताएं प्रदान करते हैं। यदि कोई व्यक्ति इस नाड़ी में स्थित चक्रों को सक्रिय करता है, तो वह आध्यात्मिक ऊँचाई पा सकता है और पूर्णता के साथ अपने जीवन का आनंद ले सकता है।

by Omprakash Kushwaha from Sonbhadra (UP) – 231216

भौतिक एवं आध्यात्मिक महत्व वाला रेणुकेश्वर महादेव मंदिर 

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सोनभद्र (08/10):  रेणुकेश्‍वर महादेव मंदिर, सोनभद्र जिले में रेणुकूट में स्थित एक भव्य मंदिर है।रेणुकेश्वर महादेव मंदिर का महत्व भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों रूप से सुंदर है। यह मंदिर रेनुकूट के प्रमुख स्थानों में से एक है। रेणुकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण वर्ष 1972 में बिड़ला जी द्वारा करवाया गया था। रेणुकूट मुख्य सड़क एक ओर हिंडाल्को कारखाना स्थित है । यह मंदिर अत्यंत सुन्दर एवं मन मोहक है, जो भक्तों को बार-बार अपनी ओर आकर्षित करती है। मंदिर अपने आप में “आध्यात्मता और भौतिकता” दोनों को एक साथ समेंटे हुए है, मंदिर की मूर्ति कला अति उत्तम है। बाहरी एवं भीतरी सतहों पर बनें चित्र एवं मूर्तियाँ बहुत सुन्दर, अद्भुत एवं अद्वितीय है।

मां वैष्णो शक्तिपीठ धाम मंदिर

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सोनभद्र (08/10): या देवी सर्वभूतेषु सुष्टि रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: मंत्र से समूचा इलाका गुंजायमान हो उठा। यह मंदिर सोनभद्र  जिले के प्रसिद्ध मंदिरों में मां वैष्णो शक्तिपीठ धाम मंदिर का स्थान विशिष्ट है। यह वाराणसी-शक्तिनगर मुख्य मार्ग पर बारी-डाला क्षेत्र में स्थित है।वर्ष 2004 में जम्मू स्थित कटरा से मां वैष्णो की अखंड ज्योति एक सप्ताह में लाई गई थी और शारदीय नवरात्र में मां जगदंबा के सभी विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। जम्मू से लाया गया अखंड ज्योति आजतक अनवरत जलता आ रहा है। जनपद से ही नहीं बल्कि बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व अन्य प्रदेशों से भी श्रद्धालु हमेशा दर्शन के लिए आते रहते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन मांगी गई हर मुराद मां जरूर पूरा करती हैं। यहां नवरात्र में लाखों की संख्या में भक्त दर्शन करने दूर दराज से आते है.

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हाइवा से टकराई स्कूल  बस,  बाल बाल बचे बच्चे

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सोनभद्र (08/10):  केन्द्रीय विद्यालय शक्तिनगर पढने आ रहे  बच्चों  की स्कूल  बस कोयले से लदे हाइवा से आमने सामने टकरा गई है। सौभाग्य से इसमे सभी बच्चे बाल बाल बचे .

by Omprakash Kushwaha from Sonbhadra (UP) – 231216

देशभक्ति समूह गीत एवं समूह गान  प्रतियोगिता

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सोनभद्र (06/10):  नगर के सिविल स्थित संत जेविसर्य उ0मा0 विद्यालय में शनिवार को अन्‍तर सदनीय देशभक्ति समूह गीत एवं अन्‍तर सदनीय देश भक्ति समूह गान की प्रतियोगिता में विद्यार्थियों खुले मन से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित किया। इस परिणाम यह हुआ कि विद्यालय का पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग से सराबोर हाे गया।

थाना समाधान दिवस

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सोनभद्र (06/10): रावर्टसगंज कोतवाली में शनिवार को थाना समाधान दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान सीओ और रावर्टसगज कोतवाली के कोतवाल ने जनता के दुख-दर्द को सुना। इस दौरान मौके पर कई समस्याओं का निस्तारण कर दिया गया।

रामलीला का शुभारंभ

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सोनभद्र (06/10): श्री रामलीला समिति के तत्वाधान में रामलीला मैदान रावर्टसगंज में मुकुट पुजन के साथ प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामलीला का शुभारंभ किया गया।

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पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर जुलूस

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सोनभद्र (04/10):  पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर गुरूवार को जिला मुख्यालय की सड़कों पर सरकारी कर्मचारियों ने जबरदस्त  निकाला और कहा कि पुरानी पेंशन बहाली योजना बहाल नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किये जाएगे।

अच्‍छे अंक पाने वाले छात्र-छात्रा सम्‍मानित 

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सोनभद्र (04/10): राजकीय पाजिटेक्निक कालेज सोनभद्र में अच्‍छे अंक पाने वाले छात्र और छात्राओं को सम्‍मानित करते सांसद छोटे लाल खरवार व कालेज के प्राचार्य ।

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गांधी जयन्‍ती के अवसर पर स्‍वच्‍छता अभियान

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सोनभद्र (02/10):  गांधी जयन्‍ती के अवसर पर स्‍वच्‍छ भारत अभियान के तहत भारतीय स्‍टेट बैंक रावर्टसगंज शाखा द्वारा स्‍वच्‍छता अभियान चलाया गया। मुख्‍य प्रबंधक एम0पी0वर्मा द्वारा झाडू लगाकर शाखा परिसर व बाहर की सफाई की।

बहुत धुम धाम से मनाई गई  गांधी-शस्‍त्री जयन्‍ती 

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ग्राम पंचायत नेवार के प्राथमिक विद्यालय में महात्‍मा ग़ांधी और लाल बहादुर शस्‍त्री के जयन्‍ती बहुत धुम धाम से मनाई गई।  इस अवसर पर  प्रभात फेरी निकली कर स्‍वच्‍छता का संदेश जान जान को दिया गया । इसमें स्‍कूल के  अध्यापक, अध्‍यापिकाओं  और आगंवाबड़ी कार्यकत्री भी शामिल हुई।

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जनपद की 70% आदिवासी आबादी वन उपज से करती है जीवनयापन

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सोनभद्र (01/10) : इस जनपद की सत्तर प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है। आदिवासियों के रहन-सहन, रीतिरिवाज और खान-पान को लेकर जुड़ी अनोखी प्रथाओं है। यहां की प्रमुख आदिवासी जातियों में गोंड, खरवार, पन्निका, भुइयां, बैगा, चेरो, घसिया, धरकार और धनुआर हैं। यहां के अधिकांश आदिवासी गांवों में रहते हैं और जीवनयापन के लिए जंगलों पर आश्रित हैं। वे तेंदू के पत्ते जमा करते हैं, जिनसे बीड़ी बनायी जाती है। इसके अलावा वे शहद व अन्य औषधीय पौधों को स्थानीय बाजार में बेचते हैं। कुछ आदिवासियों के पास छोटी खेतों  की जमीन भी है जिसमें वे चावल, गेहूं के अलावा सब्जियां उपजाते हैं।

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पर्यटकों को आकर्षित करता है मुक्खा

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सोनभद्र  का मुक्खा झरना, रॉबर्ट्सगंज – घोरवाल – मुखदारी सड़क पर स्थित है । जहा पहाडियों के बीच झरने प्राकृतिक नज़ारे जो देखते ही बनते है। यह फाल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ पर्यटकों का काफी आना जाना रहता है। यहाँ की दुर्गम पहाड़िया, पहाड़ो से गिरते झरने जो प्रकति ने जैसे अपने हाथो से बनाया हो। यह एक बहुत खूबसूरत वाॅटर फाॅल जहाँ से आपका वापस जाने का मन नही करेगा।

 बुजुर्गों को दरकिनार कर रहा है समाज

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सोनभद्र-हमारा समाज में पहले पेड़ों, पत्थरों से लेकर जानवरों तक को पूजता था परन्‍तु आज अपने बुजुर्गों को दरकिनार कर रहा है. माता-पिता को देवता माननेवाले बेटे अब उन्हें ही बोझ समझने लगे हैं. बुजुर्गो पर होनेवाले अत्याचार के मामले बढ़ रहे हैं।
एक वक्त था, जब माता-पिता को आदर्श मान उनका सम्मान किया जाता था। पूरे संसार में शायद भारत ही एक ऐसा देश है। जहां तीन पीढ़ियां सप्रेम एक ही घर में रहती थीं। आज पाश्चात्य सभ्यता के वशीभूत देश के नौजवान माता-पिता के साथ चंद सेकेंड बिताना भी मुनासिब नहीं समझते। कई मामलों में बुजुर्ग अपने बच्चों को इस कदर प्यार करते हैं कि उनकी प्रताड़ना भी खामोशी से सह लेते हैं।

by Omprakash Kushwaha from Sonbhadra (UP) – 231216

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